महादेव की कृपा, काशी का आशीर्वाद—21 अगस्त के महा मृत्युंजय महाअनुष्ठान में आज ही अपना नाम दर्ज कराएं।

काशी के प्राचीन महामृत्युंजय मंदिर में आपके नाम से महामृत्युंजय अनुष्ठान

काशी · पावन महामृत्युंजय धाम

जीवन में जब बड़ी विपत्ति, असाध्य रोग, अकाल मृत्यु का भय अथवा ग्रहों की अशुभ दशाएँ घेर लें — तब भगवान शिव की कृपा पाने का सर्वाधिक प्रभावशाली मार्ग है काशी के महामृत्युंजय मंदिर में संकल्पपूर्वक कराया गया विशेष अनुष्ठान।

ऋषि शाण्डिल्य ज्योतिष एवं अनुष्ठान केन्द्र के माध्यम से यह सम्पूर्ण अनुष्ठान काशी के विद्वान ब्राह्मणों द्वारा पूर्ण वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है।

व्यक्तिगत संकल्प

विद्वान ब्राह्मण

काशी महामृत्युंजय मंदिर

महाप्रसाद घर तक

व्यक्तिगत संकल्प

विद्वान ब्राह्मण

काशी महामृत्युंजय मंदिर

महाप्रसाद घर तक

rishi Shanilya

काशी के अति प्राचीन महामृत्युंजय मंदिर में
आपके नाम से विशेष अनुष्ठान

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यह विशेष अनुष्ठान सीधे काशी के ऐतिहासिक महामृत्युंजय मंदिर में सम्पन्न कराया जाता है, जहाँ भगवान शिव के दिव्य महामृत्युंजय स्वरूप की आराधना की जाती है।

शास्त्रों की मान्यता है कि इस पावन धाम में स्वयं भगवान शंकर विराजमान हैं और यहाँ किया गया मंत्र जप साधक के जीवन के बड़े से बड़े संकट को दूर करने की सामर्थ्य रखता है।

जब अकाल मृत्यु का भय, गम्भीर रोग, अथवा अचानक उत्पन्न विपत्तियाँ मन को घेर लें — तब यह अनुष्ठान अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होता है।

ऋषि शाण्डिल्य केन्द्र के माध्यम से यह सम्पूर्ण पूजा काशी के विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक विधि से सम्पन्न की जाती है।

काशी महामृत्युंजय मंदिर का विशेष महत्व

भारत के प्राचीनतम शिव धामों में से एक यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। यहाँ किया गया महामृत्युंजय मंत्र जप विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

दस गुना पुण्य फल

शास्त्रों के अनुसार काशी के इस प्राचीन धाम में किया गया महामृत्युंजय मंत्र जप सामान्य स्थानों की तुलना में अनेक गुना अधिक पुण्यदायी माना गया है। इसी कारण देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ अपने संकटों से मुक्ति हेतु अनुष्ठान करवाते हैं।

अष्टभुजाधारी महामृत्युंजय स्वरूप

इस मंदिर की सर्वाधिक विशेषता है भगवान शिव का अष्टभुजाधारी महामृत्युंजय स्वरूप, जिनके हाथों में अमृत कलश सुशोभित है। इसी दिव्य रूप के कारण यह स्थान महामृत्युंजय अनुष्ठान हेतु विश्व के सर्वाधिक पावन तीर्थों में गिना जाता है।

क्यों विशेष है यह अनुष्ठान?

काशी का पावन वातावरण, भगवान शिव की विशेष कृपा, विद्वान ब्राह्मणों का वैदिक मंत्रोच्चार तथा प्रत्येक श्रद्धालु का व्यक्तिगत संकल्प — यह चारों तत्व मिलकर
इस अनुष्ठान को आध्यात्मिक ऊर्जा, मानसिक शांति और सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बना देते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र जप कब और क्यों आवश्यक
माना जाता है?

प्रत्येक जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब कठिन परिस्थितियाँ, ग्रहों की प्रतिकूल दशाएँ अथवा अचानक आए संकट मन एवं शरीर को कमजोर कर देते हैं। ऐसे समय में महामृत्युंजय जप आध्यात्मिक शक्ति और संरक्षण प्रदान करता है।

राहु–केतु महादशा

जब कुंडली में राहु या केतु की महादशा अथवा अंतर्दशा में लगातार बाधाएँ, तनाव अथवा स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हों।

मारकेश ग्रह

यदि कुंडली में मारकेश ग्रह सक्रिय हो और जीवन में असुरक्षा, भय अथवा गम्भीर संकट अनुभव हो रहा हो।

कालसर्प दोष

जब कालसर्प दोष के कारण सफलता बार-बार रुक जाए, कार्यों में विलम्ब हो अथवा जीवन में निरंतर संघर्ष बना रहे।

अचानक दुर्घटनाएँ

यदि बार-बार दुर्घटनाएँ, चोट, ऑपरेशन अथवा अप्रत्याशित संकट सामने आ रहे हों।

गम्भीर बीमारी

लम्बे समय से चल रही बीमारी, उपचार में विलम्ब अथवा स्वास्थ्य की कठिन परिस्थितियों में विशेष लाभकारी।

अकाल मृत्यु का भय

जब मन में अनहोनी, असुरक्षा अथवा अकाल मृत्यु का भय निरंतर बना रहता हो।

मानसिक तनाव

अत्यधिक चिंता, डिप्रेशन, भय, नकारात्मक विचार अथवा मानसिक अशांति की स्थिति में।

नकारात्मक ऊर्जा

घर अथवा कार्यस्थल पर लगातार नकारात्मक वातावरण, बाधाएँ अथवा अशुभ प्रभाव अनुभव होने पर।

महामृत्युंजय मंत्र की पौराणिक कथा

भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का महत्व केवल आस्था तक सीमित नहीं — इसकी गाथा प्राचीन पुराणों एवं शास्त्रों में अंकित है।

ऋषि मार्कण्डेय की आयु जन्म से ही अत्यंत अल्प निर्धारित थी।

जब उनकी आयु पूर्ण होने का समय आया, तब स्वयं यमराज उनके प्राण लेने के लिए पधारे।

उस समय बालक मार्कण्डेय ने भगवान शिव के लिंग को आलिंगन कर महामृत्युंजय मंत्र का अखण्ड जप प्रारम्भ कर दिया।

उनकी अटूट भक्ति तथा मंत्र की दिव्य शक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान शंकर प्रकट हुए।

भगवान शिव ने यमराज को रोककर मार्कण्डेय की रक्षा की तथा उन्हें दीर्घायु एवं अमरत्व का वरदान प्रदान किया।

इसी घटना से महामृत्युंजय मंत्र को मृत्यु पर विजय दिलाने वाला, संकटों से रक्षा करने वाला एवं भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाने वाला दिव्य मंत्र माना जाता है।

जहाँ श्रद्धा, संकल्प और भगवान शिव की कृपा एक साथ मिलती है, वहाँ बड़े से बड़ा संकट भी दूर हो सकता है।

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अनुष्ठान कैसे सम्पन्न किया जाता है?

ऋषि शाण्डिल्य केन्द्र के माध्यम से प्रत्येक श्रद्धालु का अनुष्ठान पूर्ण वैदिक परम्परा एवं शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न कराया जाता है।

चरण 1

व्यक्तिगत संकल्प

पूजा प्रारम्भ होने से पूर्व प्रत्येक श्रद्धालु का नाम एवं गोत्र लेकर व्यक्तिगत संकल्प कराया जाता है। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग लिया जाता है, जिससे अनुष्ठान पूर्णतः विशेष बन जाता है।

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चरण 2

महामृत्युंजय मंत्र जप

काशी के विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विधिपूर्वक महामृत्युंजय मंत्र का अखण्ड जप किया जाता है।

चरण 3

वैदिक पूजा

पूरे अनुष्ठान के दौरान समस्त धार्मिक विधियाँ शास्त्रों के अनुसार सम्पन्न की जाती हैं।

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चरण 4

दशांश हवन

निर्धारित संख्या में मंत्र जप पूर्ण होने के पश्चात दशांश हवन विधिपूर्वक सम्पन्न किया जाता है।

चरण 5

महाआरती एवं आशीर्वाद

अनुष्ठान पूर्ण होने पर भगवान शिव की विशेष महाआरती की जाती है एवं सभी श्रद्धालुओं के लिए मंगलकामना की जाती है।

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अनुष्ठान से प्राप्त होने वाले लाभ

महामृत्युंजय अनुष्ठान केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, मानसिक शांति एवं भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का दिव्य माध्यम है।

स्वास्थ्य में सकारात्मक
सुधार

गम्भीर रोगों से लड़ने की मानसिक शक्ति

अकाल मृत्यु के भय
सेमुक्ति

दुर्घटनाओं एवं संकटों
से सुरक्षा

मानसिक शांति एवं
सकारात्मक सोच

नकारात्मक ऊर्जा से
मुक्ति

वास्तु के अशुभ प्रभावों
में शांति

भगवान शिव की विशेष
कृपा

स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार

गम्भीर रोगों से लड़ने की मानसिक शक्ति

अकाल मृत्यु के भय सेमुक्ति

दुर्घटनाओं एवं संकटों से सुरक्षा

मानसिक शांति एवं सकारात्मक सोच

नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति

वास्तु के अशुभ प्रभावों में शांति

भगवान शिव की विशेष कृपा

विशेष बात

इस अनुष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सामूहिक आयोजन होने पर भी प्रत्येक श्रद्धालु का व्यक्तिगत संकल्प अलग से लिया जाता है — जिससे प्रत्येक की पूजा व्यक्तिगत रूप से भगवान शिव को समर्पित होती है।

अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद आपको क्या प्राप्त होगा?

महामृत्युंजय अनुष्ठान पूजा तक सीमित नहीं है — इसके पश्चात भगवान शिव का आशीर्वाद महाप्रसाद के रूप में आपके घर तक पहुँचाया जाता है।

महाप्रसाद में आपको प्राप्त होंगे

अनुष्ठान पूर्ण होने के पश्चात यह विशेष महाप्रसाद आपके द्वारा दिए गए पते पर सुरक्षित रूप से कूरियर द्वारा भेजा जाता है — ताकि आप अपने घर पर भी बाबा भोलेनाथ के आशीर्वाद का अनुभव कर सकें।

हजारों श्रद्धालुओं का विश्वास

25+

वर्षों का अनुभव

40+

विद्वान ब्राह्मण

100%

वैदिक विधि

10,000+

श्रद्धालु सम्पूर्ण भारत से

अनुष्ठान बुक करने की सरल प्रक्रिया

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यदि आपके मन में कोई प्रश्न है, तो नीचे दिए गए उत्तर आपकी सहायता करेंगे।

क्या बीमार व्यक्ति की जगह परिवार का कोई सदस्य संकल्प ले सकता है?

हाँ। यदि रोगी स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते, तो परिवार का कोई सदस्य उनका नाम एवं गोत्र लेकर संकल्प कर सकता है। पूजा का संकल्प उसी व्यक्ति के नाम से लिया जाएगा जिसके लिए अनुष्ठान कराया जा रहा है।

यह मंदिर भगवान शिव के अति प्राचीन महामृत्युंजय स्वरूप को समर्पित है। शास्त्रों में इस स्थान को अत्यंत पवित्र माना गया है और यहाँ किया गया मंत्र जप विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

प्रति व्यक्ति मंत्र जाप की दक्षिणा ₹1,100 निर्धारित है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध हैं, तथा दोनों की दक्षिणा समान (₹1,100 प्रति व्यक्ति) है। मंत्र जाप एवं पूजा का समय प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक है।

पूजा वास्तविक रूप से काशी के मंदिर में विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सम्पन्न होती है और श्रद्धालु का संकल्प विधिपूर्वक लिया जाता है। श्रद्धा एवं विश्वास के साथ कराया गया अनुष्ठान पूर्ण धार्मिक महत्व रखता है।

अनुष्ठान पूर्ण होने के पश्चात बाबा की पावन भस्म, रक्षा सूत्र तथा विशेष महाप्रसाद आपके पते पर कूरियर द्वारा भेजा जाता है।

आस्था, विश्वास और अनुभव का संगम
आचार्य ऋषि शांडिल्य के मार्गदर्शन में जीवन की हर समस्या का सटीक ज्योतिषीय समाधान।

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